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किसान अपनाए ड्रिप एवं स्प्रिंक्लर सिंचाई प्रणाली :फुलिया

कुरुक्षेत्र, पिहोवा 4 अक्तूबर: उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने कहा कि कम खर्च पर आय को दौगुना करने के लिए किसानों को ड्रिप एवं स्प्रिंक्लर सिंचाई प्रणाली को अपनाना चाहिए। इस प्रणाली को अपनाकर किसान बेशकिमती भूजल को भी बचाने में कामयाब होंगे। इस प्रणाली को अपनाने के लिए राज्य सरकार किसानों को लगातार प्रेरित कर रही है। इतना ही नहीं राज्य सरकार ने करोड़ों रुपए का बजट खर्च करके पिहोवा के गांव गुमथला गढ़ में 9 एकड़ भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजैैक्ट को भी स्थापित किया गया है।

उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने किया सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजैक्ट का 
अवलोकन, राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार है यह योजना

उपायुक्त वीरवार को पिहोवा के गांव गुमथला गढ़ में सिंचाई विभाग काडा द्वारा किसान कर्ण सिंह के सहयोग से 9 एकड़ भूमि में खड़ी फसल का अवलोकन करने के उपरांत किसानों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले उपायुक्त डा. एसएस फुलिया, काडा के कार्यकारी अभियंता नीरज शर्मा व अन्य अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजैक्ट का बारिकी से निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत की। इस दौरान उपायुक्त ने किसानों को फसल के अवशेष ना जलाने के प्रति भी जागरुक किया। उन्होंने कहा कि स्वर्ण जयंती वर्ष में राज्य सरकार ने प्रदेश के किसानों को एक नायाब सौगात दी थी। राज्य सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजैक्ट को अमलीजामा पहनाया गया था। इस प्रोजैक्ट पर 24 करोड़ 65 लाख रुपए खर्च किए गए थे और इस परियोजना से 13 जिलों व 15 गांवों के लाखों किसानों का फायदा मिलेगा। अहम पहलु यह है कि इस प्लांट में सौर उर्जा पैनलों द्वारा पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली नजदीकी पॉवर सब-स्टेशन में भेजा गया, जो 24 घंटे प्लांट के साथ 11 केवी लाईन के साथ जुड़ा है। इस परियोजना का शुभारम्भ स्वयं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 30 जुलाई को पिहोवा के गांव गुमथला गढ़ डेरा फतेह सिंह की पावन धरा से किया था।

उपायुक्त ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हर खेत तक पानी पहुंचाने के उदेश्य से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत काडा हरियाणा द्वारा सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजैक्ट को स्थापित किया गया है। इस परियोजना पर कुल 24.65 करोड़ रुपए खर्च किए गए है। प्रदेश में कोई भी बारह मासी नदी नहीं है और दो तिहाई हिस्से में भूमिगत जल का स्तर खारा है। जिसके कारण जल की खपत में प्रत्यके वर्ष अप्रत्याषित वृद्धि हो रही है जबकि उपलब्ध जल की मात्रा सीमित है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भविष्य को देखते हुए पानी के महत्व को लेकर नहरी क्षेत्र विकास प्राधिकरण हरियाणा को पायलट परियोजना तैयार करने के आदेश दिए थे। इस योजना से सूक्ष्म सिंचाई के लिए किसानों को प्रैशर के साथ नहरी पानी मिलेगा और इस पानी को टपका सिंचाई व फव्वारा सिंचाई विधि के द्वारा प्रयोग में लाया जा सकेगा। इससे पानी की खपत में कमी आएगी और ज्यादा से ज्यादा किसानों को पानी मिल पाएगा। इससे सरकार के हर खेत को पानी के लक्ष्य को साकार किया जा सकेगा।



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