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देश विदेश में भी हरियाणवी संस्कृति की अनूठी छाप छोड़ रहा है रत्नावली: कटारिया



कुरुक्षेत्र, 2 नवम्बर। केन्द्रीय जलशक्ति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रत्नलाल कटारिया ने कहा कि देश विदेश में भी हरियाणवी संस्कृति की अनूठी छाप छोडऩे का काम रत्नावली महोत्सव बखूबी कर रहा है। इस महोत्सव के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति को एक नई पहचान मिली है और विदेशों में भी इस महोत्सव का लोग इंतजार करते हैं। यह रत्नावली महोत्सव हरियाणा की पहचान बन चुका है। 
केन्द्रीय राज्यमंत्री रत्नलाल कटारिया शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आडिटोरियम हॉल में युवा सांस्कृतिक एवं कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव में बोल रहे थे। इससे पहले केन्द्रीय राज्यमंत्री रत्नलाल कटारिया, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा, कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना, निदेशक प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा ने महोत्सव में पहली बार लगाए गए हरियाणवी शिल्प ग्राम प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सभागार में दीपशिख प्रज्ज्वलित कर 4 दिवसीय रत्नावली महोत्सव का शुभारंभ किया और प्रसिद्ध कलाकार महावीर गुड्डू द्वारा किए गए शंखनाद से इस महोत्सव का आगाज हुआ।
उन्होंने रत्नावली महोत्सव के शानदार आयोजन पर कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि 8 विधाओं और 300 कलाकारों से शुरू होने वाले रत्नावली महोत्सव ने एक बड़ा स्वरूप ले लिया है। यह महोत्सव पूरे विश्व में पूरे हरियाणवी संस्कृति का परचम फहरा रहा है। इस महाकुंभ में अब 30 विधाओं में 2000 से ज्यादा कलाकार अपनी भागेदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। इस महोत्सव में युवा पीढ़ी के उत्साह को देखकर एक सुखद अहसास भी होता है कि आज युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति से दूर हटकर हरियाणवी संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। इतना ही नहीं इस महोत्सव के माध्यम से युवा पीढ़ी हरियाणवी संस्कृति को सहेजने का काम भी कर रही है। उन्होंने हरियाणवी शिल्प ग्राम प्रर्दशनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ग्रामीण आंचल में हस्त कला को प्रदर्शित करने वाली यह प्रर्दशनी युवा पीढ़ी को अहसास करवा रही है कि हरियाणवी संस्कृति दुनिया में सबसे अव्वल है और आज प्राचीन संस्कृति और संस्कारों को अपनाने की जरूरत है। यह महोत्सव नैतिक मूल्यों का भी अहसास युवा पीढ़ी को करवा रहा है।
केन्द्रीय राज्यमंत्री रत्नलाल कटारिया ने राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव का किया शुभारंभ, 4 दिवसीय रत्नावली महोत्सव में प्रदेशभर से 30 विधाओं में भाग ले रहे हैं 2000 से ज्यादा कलाकार, केन्द्रीय राज्यमंत्री ने किया हरियाणवी शिल्प ग्राम प्रदर्शनी का अवलोकन

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चन्द्र शर्मा ने मेहमानों और प्रदेश के कोने-कोने से आए कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पिछले 34 वर्षो से रत्नावली महोत्सव का आयोजन कर रहा है। गत वर्ष की तरह इस बार भी प्रदेशभर से युवा कलाकार इस सांस्कृतिक महाकुंभ में भाग ले रहे हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का यह सांस्कृतिक उत्सव हरियाणा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को यहां मंचित करने में सफल होगा। पिछले 3 दशकों से प्रदेशभर के कालेजों व विश्वविद्यालयों से युवा कलाकार इस मंच के माध्यम से हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को मंचित करते आ रहे हैं। यह प्रयास सराहनीय है। 
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय 1985 से इस समारोह को निरंतर आयोजित कर रहा है। जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब इस समारोह में 8 विधाओं में 300 कलाकार भाग लेते थे।  इस वर्ष इस महोत्सव में 30 विधाओं के माध्यम से 2000 से अधिक युवा कलाकार भाग लेने वाले हैं। इस महोत्सव को रोमांचक बनाने के लिए निरंतर नए प्रयास किए जाते रहे हैं। इन प्रयासों के लिए हम इससे जुड़े सभी कला प्रेमियों व विशेषकर दर्शकों को बधाई देते हैं। पहली बार इस महोत्सव में हरियाणवी कोरियोग्राफी विधा को प्रतियोगिता का हिस्सा बनाया गया है। इसके लिए युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग को विशेष रूप से बधाई देता हूं।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. तेजेन्द्र शर्मा ने मेहमानों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि रत्नावली हरियाणा की संस्कृति का एक ऐसा महोत्सव है जिसके लिए प्रदेश के सभी लोक कलाकार वर्ष भर इंतजार करते हैं। मैं ऐसे सभी कलाकारों को उत्साह, जोश व उनकी उर्जा के लिए उनका अभिनंदन करता हूं। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग लगभग 3 दशकों से छात्रों में युवा प्रतिभा का मंचन, हरियाणा की संस्कृति के पोषण एवं मंचन हेतु अनेक कार्यक्रम आयोजित करता आया है। रत्नावली हरियाणा के जन-जन तक पहुंचे इसलिए इस बार रत्नावली को डिजीटल रत्नावली को डिजीटल रत्नावली बनाने का प्रयास किया गया है। डिजीटल, ग्रीन व अनुशासनशील रत्नावली इस बार का मुख्य संदेश है। 
यूनिवर्सिटी सांस्कृतिक परिषद् के अध्यक्ष डॉ. हरिप्रकाश शर्मा ने भी अपने विचार प्रकट किए। रत्नावली के मुख्य मंच का संचालन संगीत विभाग के शिक्षक डॉ. अशोक शर्मा ने किया। इस उद्घाटन सत्र में आर्य पीजी कॉलेज के विद्यार्थियों ने रसिया की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया। इसके अलावा विभिन्न कालेजों से आए कालेजों ने अपनी प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाह-वाह लूटी। इस मौके पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा, एसडीएम लाडवा अनिल यादव, डिप्टी डायरेक्टर डीवाएसीए डॉ. हितेन्द्र त्यागी सहित डीन, डायरेटर, अधिकारी, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी, वालिंटियर, विद्यार्थियों सहित अन्य लोग  मौजूद थे।

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