गांव-गांव जाकर तीनों कृषि कानूनों की कमियां गिनवाएंगे - आर्य - Discovery Times

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

09 October 2020

गांव-गांव जाकर तीनों कृषि कानूनों की कमियां गिनवाएंगे - आर्य

कुरुक्षेत्र (सतीश भारद्वाज) भारतीय किसान मजदूर नौजवान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र आर्य दादूपुर ने राजपूत धर्मशाला कुरुक्षेत्र में किसानों की बैठक को संबोधित किया। किसान नेता राजेन्द्र आर्य दादूपुर ने कहा कि जिस तरीके से बीजेपी के नेता गांव-गांव जाकर 3 कृषि अध्यादेशों के बारे में भ्रम फैला रहे हैं, किसानों को भ्रमित होने से बचाने के लिए भारतीय किसान मजदूर नौजवान यूनियन सभी गांवों में जा-जाकर किसानों को तीनों काले कानूनों के दुष्प्रभावों के बारे में जनता को जागरूक करेंगे। इससे पूर्व राजेन्द्र आर्य ने कुरुक्षेत्र व पिपली अनाजमंडी का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी मंडियों में धान खरीद का उचित प्रबंध नहीं है। किसान नेता राजेन्द्र आर्य ने कहा कि यूनियन के कार्यकर्ता विधायक असीम गोयल का किसानों के समर्थन में धरने पर बैठने पर आभार व्यक्त करते हैं। इस अवसर पर चौधरी सुखबीर सिंह को जिला कुरुक्षेत्र का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।  इस अवसर पर सीपीएस तंवर, भूपेन्द्र सिंह, केवल सिंह राणा, रामपाल, बलबीर सिंह, सोहन सिंह अजराना, रामसिंह लुखी सहित अन्य किसान मौजूद रहे। 

"सुखबीर सिंह को जिला कुरुक्षेत्र का अध्यक्ष किया नियुक्त"

किसान नेता राजेन्द्र आर्य दादूपुर ने कहा कि तीनों नए कृषि कानूनों को जबरदस्ती किसानों पर थोपा जा रहा है। किसान की आमदनी लगातार घट रही है। जिससे किसानों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। ये कानून किसानों के लिए जहर के टिके के समान हैं। जिनका किसानों पर साईड इफेक्ट व रिएक्शन है। जिसको खत्म करने के लिए एंटी बायोटिक के तौर पर चौथा अध्यादेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद गारंटी कानून, भुगतान गारंटी, दंडनीय अपराध की श्रेणी के साथ लाया जाए। एमएसपी से कम रेट पर फसल खरीदने वाले व्यापारी को कम से कम 5 साल की सजा का प्रावधान हो। 


एपीएमसी एक्ट टूटने से हरियाणा और पंजाब की स्थिति बिहार व उड़ीसा से भी बदत्तर हो जाएगी। 2006 में बिहार में मंडियां तोड़ी गई थी। उसके बाद से वहां के हालात बद से बदत्तर हो गए हैं। तीनों कृषि कानून किसानों का डेथ वारंट हैं। लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा में किसान विरोधी प्रतिनिधियों ने काले कानून लाकर जनता को सड़क पर लड़ाई लडऩे पर मजबूर कर दिया है। 


सतीश भारद्वाज

9896902911

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here