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16 December 2020

विपक्ष ने 55 साल के कार्यकाल में नहीं किया किसानों का भला, अब कर रहें है गुमराह: नायब

Kurukshetra

कुरुक्षेत्र 16 दिसम्बर(अनिल धीमान):सांसद नायब सिंह सैनी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अपने 6 सालों के कार्यकाल में किसानों की आय को बढ़ाने तथा आर्थिक मजबुती प्रदान करने के लिए अनेकों योजनाओं को अमलीजामा पहनाया। सरकार ने अब किसानों को आर्थिक मजबुती देने और फसलों को किसी भी मंडी में बेचने की आजादी देने के लिए देश के किसान संगठनों के अनुरोध पर ही कृषि कानूनों को तैयार किया है। इन कृषि कानूनों से किसानों की आय में ओर इजाफा होगा तथा आर्थिक रुप से मजबुती मिलेगी। अहम पहलु यह है कि इस देश में जब विपक्षी दलों की जमीन खिसकती नजर आई तो किसानों के कंधों पर बंदूख रखकर निशाना साधने का प्रयास किया है। खास बात यह भी है कि जब पंजाब में पहले से ही कान्ट्रैक्स फार्मिंग चल रही है तो किसान आंदोलन को तूल देने के पीछे क्या उदेश्य है।

सांसद नायब सिंह सैनी बुधवार को सर्किट हाउस में देर सायं कृषि कानूनों को लेकर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में तीनों कृषि कानून बनाए गए। यह कानून किसान की मजबुती और आय बढ़ाने के लिए क्रांतिकारी कदम है। अब विपक्ष किसानों को भ्रमित कर और झूठ बोलकर गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 6 सालों में किसानों को मजबुत करने के लिए अनेकों योजनाओं को लागू किया जो आजादी के बाद 55 सालों तक किसी भी सरकार नहीं किया और न ही किसी सरकार ने एमएसपी चिंता की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 से लगातार किसान की आय को वर्ष 2022 तक दौगुना करने के लिए कार्य किए है और आय बढ़ाने के लिए एमएसपी में ढेड़ गुण बढौतरी करने का काम किया है। इस सरकार ने एमएसपी के रुप में धान की फसल के लिए 5 लाख करोड़ तथा गेंहू की फसल के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया है। केन्द्र सरकार ने के्रडिट कार्ड योजना बढ़ाने, मृदा जांच के लिए अलग योजना बनाकर दवाई, खाद के खर्चों को कम किया ताकि किसान की आमदन बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 6 हजार रुपए, पीएम फसल बीमा योजना के जरिए किसानों को जोखिम फ्री करने, कृषि यंत्रों पर भारी सबसीडी देने, खाद के लिए लगने वाली लाईनों से निजात दिलाकर नीम कोटिड यूरिया उपलब्ध करवाने, पीएम सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और टपका सिंचाई के लिए सबसीडी देने, हर वर्ष एमएसपी बढ़ाकर किसानों को मजबुत करने का काम किया है। सरकार की सोच है कि किसान की आय बढ़े ताकि किसान खुशहाल और मजबुत बन सके। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल किसानो ंको कृषि बिलों को लेकर गुमराह करने का काम कर रहे है जो कि एक चिंता का विषय है। विपक्ष ने किसानों की शंकाए बढ़ाने का काम किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्टï शब्दों में कहा कि सरकार किसान की हर शंका और भ्रम को दूर करेेगी और किसी को भी दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। किसान संगठनों में भी प्रधानमंत्री से मिलकर कृषि बिलों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने 2019 के अपने मेनिफेस्टों में कृषि बिल का जिक्र किया था, इसलिए विपक्षी दलों का दोहरा चेहरा भी सामने आ गया है।

सांसद ने कहा कि एमएसपी और मंडियां खत्म नहीं होगी और न ही कोई पंूजीपति किसान की जमीन पर कब्जा कर पाएगा। एमएसपी पहले की तरह लागू रहेगा और निरंतर बढ़ता रहेगा। इस कानून में कही भी इस बात का जिक्र नहीं है कि कान्ट्रैक्ट फार्मिंग में जमीन के साथ कान्ट्रैक्ट होगा अपिुत यह स्पष्टï किया गया है कि फसल के लिए ही अनुबंध होगा। इस बिल में किसान अपनी फसल को खेतों से, मंडियों में और किसी भी बाजार में अच्छे दामों पर बेच सकेगा। देश के किसान संगठन, एफपीओ, प्रगतिशील किसानों ने केन्द्रीय कृषि मंत्री से मिलकर कानूनों की प्रशंसा की है कि पहली बार किसानों को फसल बेचने की आजादी मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार ने धरने पर बैठे लोंगों की बात को सुना और उनके सुझावों पर अमल करने के लिए 3 मंत्रियों की कमेटी भी गठित की है। सरकार ने किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए कमेटी का गठन किया ताकि कोई विवाद शेष ना रह जाए। इस कमेटी के समक्ष जितने भी सुझाव आए, उसको सरकार ने माना। इसके बावजूद विपक्ष किसानों को गुमराह करने का काम कर रही है। इस धरने पर कुछ असामाजिक तत्व भी नजर आने लगे है। इस पर गृह मंत्रालय अपनी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के सांसदों और विधायकों ने केन्द्रीय मंत्री से मिलकर एजेंडे में एसवाईएल के पानी के समझौते को लागू करने के लिए अनुरोध किया है क्योंकि अदालत ने भी हरियाणा के हक में फैसला दिया है, इसलिए पंजाब सरकार को हरियाणा के किसानों का हक देने की भी बात करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने लखवार, रेणुका बांध एमओयू पर भी कार्रवाई करने के लिए भी मांग की है। किसानों के लिए केन्द्र सरकार ने जहां फसली ऋण को 18 प्रतिशत से कम करके 12 प्रतिशत फिर 9 प्रतिशत और फिर से 7 प्रतिशत किया। लेकिन विपक्ष की सरकार ने इस विषय पर जरा सा भी ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं हरियाणा में अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल की नेतृत्व वाली सरकार ने फसली ऋण को जीरो प्रतिशत करने का काम किया और केन्द्र सरकार ने फसली ऋण को 4 प्रतिशत करने का काम किया है। केन्द्र और राज्य सरकार 24 घंटे किसानों की समस्या सुनने और उनकी समस्या का समाधान करने का काम कर रही है और निरंतर करती रहेगी। इस मौके पर थानेसर विधायक सुभाष सुधा, पूर्व विधायक डा. पवन सैनी, भाजपा के जिला अध्यक्ष राज कुमार सैनी, पूर्व जिला अध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, महामंत्री रविन्द्र सांगवान, महामंत्री सुशील राणा, ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष जसविन्द्र सिंह, शुभम, विक्रम आदि नेता उपस्थित थे।

 

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