अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2022 में पहली बार पर्यटकों को देखने के लिए मिलेगा 23 प्रदेशों की शिल्पकला का अनोखा संगम - DISCOVERY TIMES

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21 November 2022

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2022 में पहली बार पर्यटकों को देखने के लिए मिलेगा 23 प्रदेशों की शिल्पकला का अनोखा संगम

 

कुरुक्षेत्र 21 नवंबर ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर पहली बार देश के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों को 23 राज्यों की शिल्पकला का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। इस महोत्सव में 23 राज्यों के 230 शिल्पकार पहुंच चुके है। इन शिल्पकारों में 9 राष्ट्रीय अवार्डी, 17 स्टेट अवार्डी, 5 राष्ट्रीय व 9 राज्य प्रमाण पत्र से सम्मानित है। इसके अलावा 1 शिल्पगुरू कलानिधि अवार्डी, 2 संत कबीर अवार्डी शामिल है। इन शिल्पकारों के लिए राज्य सरकार, प्रशासन और केडीबी की तरफ से पुख्ता प्रबंध किए गए है।

उपायुक्त शांतनु शर्मा ने बातचीत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2022 में पर्यटकों के लिए देशभर से शिल्पकारों को निमंत्रण भेजा गया था। इसके लिए उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र पटियाला (एनजेडसीसी) को शिल्पकारों को आमंत्रित करने की जिम्मेवारी सौंपी गई। इस संस्थान के माध्यम से देश के सभी राज्यों को पत्र लिखकर शिल्पकारों को कुरुक्षेत्र में भेजने के लिए निवेदन किया गया। इस निवेदन के बाद अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में 23 राज्यों के 230 शिल्पकार पहुंच चुके है। इनमें उत्तर प्रदेश से 63, जम्मू कश्मीर से 25, हरियाणा से 15, गुजरात से 4, पंजाब से 19, पश्चिम बंगाल से 12, राजस्थान से 10, दिल्ली से 21, कर्नाटक से 1, तेलंगाना से 10, उत्तराखंड से 4, आंध्रप्रदेश से 1, असम से 5, महाराष्ट्र से 5, बिहार से 3, मध्यप्रदेश से 7, हिमाचल से 5, छत्तीसगढ़ से 2, पांडिचेरी से 2, झारखंड से 2, गोवा से 1, चंडीगढ़ से 10 व तमिलनाडु से 4 शिल्पकार पहुंचे है।

ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर पहली बार पर्यटकों को देखने के लिए मिलेगा 23 प्रदेशों की शिल्पकला का अनोखा संगम
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2022 में 23 राज्यों के पहुंचे 230 शिल्पकार, शिल्पकारों में 9 राष्ट्रीय अवार्डी, 17 स्टेट अवार्डी, 2 संत कबीर अवार्डी, एक-एक शिल्प गुरु कला निधि अवार्डी, 7 राष्ट्रीय प्रमाण पत्र अवार्डी बढ़ा रहे है महोत्सव की शान, सबसे ज्यादा 63 शिल्पकार पहुंचे उतर प्रदेश, मेजबान हरियाणा के 15 शिल्पकार भी महोत्सव में दिखा रहे है प्रदेश की लोक कला का, एनजेडसीसी की तरफ से किया गया है शिल्पकारों को आमंत्रित

उन्होंने कहा कि इन शिल्पकारों में 9 शिल्पकार राष्ट्रीय अवार्डी, 5 राष्ट्रीय प्रमाण पत्र से सम्मानित, 17 स्टेट अवार्डी, 2 संत कबीर अवार्डी, 1 कलानिधि, 1 शिल्पगुरू, 1 हैंडीक्राफ्ट, 9 राज्य स्टेट प्रमाण पत्र, 1 एमएसएमई मंत्रालय से शामिल है। इस वर्ष अकेले जम्मू कश्मीर से 6 राष्ट्रीय अवार्डी, 3 स्टेट अवार्डी और 1 शिल्प गुरु अवार्डी शिल्पकार है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश से 5 राष्ट्रीय अवार्डी, 8 स्टेट अवार्डी, 2 संत कबीर अवार्डी, 2 राज्य प्रमाण पत्र आवार्ड से सम्मानित है। उन्होंने कहा कि मेजबान हरियाणा से भी एक कला निधि अवार्डी, 1 स्टेट अवार्डी, 1 हैंडीक्राफ्ट अवार्डी और 3 मेरिट प्रमाण पत्र अवार्डी शामिल है। इन अवार्ड विजेताओं के साथ-साथ कई ऐसे शिल्पकार है, जिन्होंने अपनी-अपनी शिल्पकला में एक नया मुकाम हासिल किया हे।

उन्होंने कहा कि इन शिल्पकारों की हैंडलूम, टेक्सटाईल, लैदर, कांस्य मैटल ज्वैलरी, कैन एंड बम्बू, लक्त साड़ी है सिल्क ड्रेस मेट, कलमकारी ड्रेस मेट, हैंड प्रिंटिड टेक्सटाईल, जैकेट-कोट, शॉल, बैड शीट, बेड कवर, फ्लोर कवरिंग, पैच वर्क, वूडन कारविंग, लैदर आर्ट, ज्वैलरी, टेराकॉट पॉट, डोल एंड टवायज, वूडन टवायज, वूडन एंड जरी, पेंटिंग्स, जयपुरी रजाई, नामदा, स्टोन कारविंग, मीनाकारी ज्वैलरी, पैडी एंड स्ट्रा क्राफ्ट, ड्राई फ्लवार, सोलापिट, पोईट्री एंड क्ले, पंजाबी जूती, फुलकारी, पशमीना शॉल, कनी शॉल, पेपर मच्ची, कावा एंड ड्राई फ्रूट, करुवा बूटी साड़ी, ब्लू आर्ट पोईट्री पर्यटकों के लिए ब्रहमसरोवर के पावन तट पर सज चुकी है।

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